Thursday, February 14, 2019

Blogger Me Favicon Kaise lagaye ? इसकी पूरी जानकारी हिंदी में

Blogger Me Favicon Kaise lagaye ? इसकी पूरी जानकारी हिंदी में 


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अपने अभी जल्दी ही blogging  की शुरुआत की है तो अपने favicon का तो नाम सुना ही होगा और अगर नहीं सुना है तो इस पोस्ट को पढने के बाद आपको उसके बारे में सारी जानकारी हो जाएगी |

Favicon क्या होता है

favicon का मतलब होता है favorite icon ये साइज़ में बहुत ही छोटा होता है इसको हम website icon ,tab icon, URL icon के नाम से भी जानते है इसका use browser में आपके blog/website को पहेचानने के लिए किया जाता है ये सारे sites के लिए unique होते है क्यंकि हम अपने according इनको अपनी साईट में लगते है सीधे तोर पर इसका मतलब है अपनी पसंद का icon जो आपके ब्लॉग ही पहेचान कराये |उद्धारण के लिए Blogger.com को जब आप open करते है तो tab के अन्दर आपको B लिखा दीखता है orange background के उपर white कलर में इसको ही favicon बोलते है 

Favicon history

Microsoft ने मार्च 1999 में Internet Explorer 5 को launch किया था | जोकि favicons को support करता था | इसके पहेले favicon एक file हुआ करती थी जिसका नाम favicon.ico होता था और ये website की root director में मौजूद होती थी |

Free Me Blog Kaise Banaye? ब्लॉग की पूरी जानकारी हिंदी में 

Benefits

  • इसकी मदद से आपके blog/website को आसानी से पहेचाना जा सकता है |
  • लोगों में आपके ब्लॉग के प्रति एक भरोसा सा हो जाता है क्यूंकि सभी blog/websites इसका use करते है |
  • आपके users का समय बचता है जब वो अपने bookmarks में से आपके ब्लॉग को सर्च करते है क्यूंकि visual चीजें को हम आसानी के साथ identify कर लेते है
  • इसका उपयोग करने से आपके blog की free में ब्रांडिंग हो जाती है  

favicon Size

पहेले के समय जब इसकी सुरुआत हुई तब केबल 16x16 pixel icon की जरूरत होती थी जिसको website की root directory में place किया जाता था | लेकिन अब तो बहुत सारी size के favicon बनाये जाते है 32x32 एक Standard size है लगभग सभी desktop browsers के लिए |

       1 ) Top 5 Search Engines जो लगातार परिणाम खोजने में हमारी मदद करते है 

     2 ) 5G Technology क्या है और ये भारत में कब आने वाली है जाने सब कुछ इसी के बारे में

favicon कैसे बनाये 

इसको बनाना बहुत ही आसन होता होता है इसके लिए आप online मौजूद किसी भी favicon  generators का use कर सकते है और अपनी पसंद का favicon बना के अपनी site में लगा सकते है लेकिन आपको अपनी site के नाम का ही आइकॉन बनाना चाहिए जिससे सब आपके blog या website को जाने | तो इसके लिए मैं आपको कुछ  online generators के नाम बता रहा हूँ जिनसे आप बना सकते है 
You can do it on your own or use help online. It is not necessary to use any special online generators to create one, although it is quite convenient and simple. Here are some examples of websites that can help:

  1. Favicon Generator
  2. Degraeve Favicon
  3. Favicon Generator ORG
  4. Favigen
  5. Dynamic Drive Favicon Tool
  6. Gen Favicon

Blogger में Favicon कैसे लगाये |

1 ) इसके लिए आप सबसे पहेले favicon बना ले | और बना लिया है तो सबसे पहेले अपने ब्लॉग में login कर ले |

2 ) login करने के बाद आपको layout पर click करना है जैसा आप नीचे दी गई फोटो में देख रहे होंगे | इसके बाद आपके सामने एक पॉपअप window open हो जाएगी |


3 ) यहाँ पर आपको simply edit पर क्लिक कर देना है और आपको ये next पॉपअप window पर लेके जायेगा |


4 ) यहाँ आपको दो काम करने है एक तो अपने laptop/desktop में जहाँ कहीं भी अपने favicon बनाने के बाद रखा है वहां जाके उसको select कर लेना है और इसके बाद आपको save पर click करने के बाद पेज को refresh करना है 


इसके बाद भी आपको अगर favicon नहीं दिख रहा है तो आप इस process को step 1 से लेकर step 4 तक repeat करे |

अगर अभी भी आपका कोई सवाल है तो आप comment कर के हमसे बिना किसी झिझक के पूंछ सकते है और में आशा करता हूँ आज आपको जो न्यू blogger है उसको favicon कैसे लगाना है समझ आया होगा और वो अपने ब्लॉग में इसको apply भी कर चुके होंगे | तो मैं आपका दोस्त आपसे विदा चाहूँगा और आपसे न्यू पोस्ट में किसी न्यू topic के साथ फिर मिलता हूँ |













Wednesday, February 13, 2019

OLED क्या है और LCD से कितनी अलग है


OLED क्या है और LCD से कितनी अलग है 

आज कल आप सभी देखते होंगे की Tv की मोटाई पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है नहीं तो पहले के टीवी थोड़े से भारी होते थे | और ये सब मुम्किन हो पाया है OLED के  आ जाने से और आज में आपको इस पोस्ट में इसके बारे में पूरी जानकारी दूंगा तो मै हूँ आपका दोस्त आपके साथ चलो आज कुछ सीख लेते है दोस्तों

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OLED TV


OLED क्या है  

OLED का मतलब होता है organic light emitting diode जो एक प्रकार का LED ही होता है इसको बनाने के लिए दो conductors के बीच में organic layers को रखा जाता है और जब इनमे electricity pass कराई  जाती  है तो ये light को उत्सर्जित करती है OLED का मुख्य रूप से display बनाने में किया जाता है for example मोबाइल डिस्प्ले ,कंप्यूटर मॉनीटर्स और गेम कंसोल्स को बनाने में किया जाता है एक OLED display बिना back light के काम करती है क्यंकि ये visible light को उत्सर्जित करती है जबकि LCD में back light की जरूरत पड़ती है इसलिए OLED ,LCD से अच्छे रंग दिखती है OLED गहरे black levels को दिखा सकती है और LCD के मुकाबले बहुत ही पतली होती है OLED को काम करने के लिए बहुत ही काम electricity की जरूरत पड़ती है OLED  मुख्यता दो तरह से बनाई जाती है जिसमे से  पहेली है PMOLED  में dispaly की  हर row  sequentially control की जाती  है  एक  एक  कर के जबकि   AMOLED एक thin film transistor backplane का प्रयोग करता है जिससे ये directly access और switch on और off कर सके हर एक individual डायोड को जोकि लार्ज display size और higher resolution को allow करता है इसका contrast ratio LCD के मुकाबल ज़्यदा होता है

OLED का इतिहास 

पहला OLED device 1987 में America के फिजिकल chemist Ching.W  और Steven Van Slyke के द्वारा Eastman Kodak में बनाया गया था | इनका device कम voltage का use करता था और इसकी efficiency पहले बनाये गए devices से ज्यादा थी और समय समय पर इसमें बदल किये जाते रहे है और आज हम इसका बहुत ही उनन्त रूप देखते है

OLED और LCD में अंतर

अगर हम OLED की तुलना LCD से करे तो OLED कई तरह से बेहतर है जैसे

1 )LCD display में एक single backlight होती है जोकि display के पीछे होती है और चाहे display black color ही produce कर रही हो पर वो पावर consume कर रही होती है जबकि OLED pixels से मिलकर बनी होती है और हर एक pixel के पास खुद की light होती है तो जब जिस pixel  को  glow करना होता है उस समय बस वही पिक्सेल glow करता है इससे display कम power use करती है

2 ) OLED की image quality बहुत ही अच्छी होती है ये LCD से अच्छा कलर contrast produce करती है

3 ) LCD के मुकाबले इसका viewing angle ज़्यदा होता है और wide color रेंज produce करती है

4 ) Normal डिज़ाइन होने के कारण ये बहुत पतला ,फ्लेक्सिबल और ट्रांसपेरेंट भी होती है

5 ) LCD के मुकाबले OLED  बहुत durable होती है
                
                 
                 

OLED काम कैसे करती है 

OLED दो conductors के बीच में organic material की layers को रख के बनाई जाती है और ये एक किस्म की LED ही है तो ये सामान्य LED की तरह ही काम करती है इसमें जो conductors use किये जाते है वो anode और cathode  कहलाते है एक normal OLED कुल 6 परतो से मिलके बानी होती है इसमें ऊपर और नीचे glass की परत होती है जो इसको सुरक्षित रखती है ऊपर वाली layer को seal और निचली layer को subtract कहा जाता है और जब इन्ही anode और cathode में इलेक्ट्रिक current पास किया जाता है तो material कलर उत्सर्जित करता है

OLED के प्रकार   

वैसे तो OLED कई तरह की होती है जिनमे से मै आपको कुछ के बारे में बताऊंगा

1) Passive matrix OLED

इनमे cathode की strips ,organic layes और anode की strips होती है anode की strips cathode की strips के समानांतर होती है cathode और anode का interaction मिलके pixels बनाते है जिनसे light उत्सर्जित होती है इसमें बाहरी source से चुने हुए  anode और cathode में electric करंट पास किया जाता है जो की determine करता है की कोनसा pixel on होगा या कोनसा pixel off ही रहेगा और pixels की brightness current के amount पर निर्भर करती है

2)Active matrix OLED

Active matrix LED जिसको हम अमोलेड़ (AMOLED ) के नाम से भी  जानते है ये cathode ,organic molecules और anode की full layers से मिलकर बनी होती है लेकिन anode layer overlay करती है TFT ऐरे के साथ जोकि एक matrix बनाते है TFT  array खुद में एक सर्किट होता है जो ये पता लगाता है की कौन सा pixel on होगा और image को बनाएगा | AMOLED डिस्प्ले PMOLED से कम power consume करती है क्यंकि TFT array को बाहरी source के मुकाबले कम पावर की जरूरत होती है

3) Transparent OLED

ये केबल transparent component ही रखती है और जब ये off की जाती है तो लगभग 85 % ये transparent होती है और जब ये on की जाती है तो ये लाइट को दोनों ओर pass होने देती है एक transparent OLED दोनों तरह की हो सकती है active matrix या passive matrix

4)Top emitting OLED

top emitting OLED  reflective सब्सट्रेट को रखती है और ये सबसे अच्छी रहती है active matrix design के लिए, मैन्युफैक्चरर इनका use smart card को बनाने में करते है

5) Foldable OLED

foldable OLED बहुत ही ज़्यदा फ्लेक्सिबल metallic foils या plastic से मिलकर बानी होती है ये बहुत ही ज़्यदा हलकी और durable होती है ये मुख्य रूप से मोबाइल फ़ोन्स या PDA's  को बनाने में किया जाता है जिससे repair और return के cases को कम किया जा सकते, foldable display का प्रयोग smart cloths को बनाने में भी किया जाता है

6) White OLED

White OLED के नाम से ही पता चलता है की इसका use सफ़ेद रौशनी को उत्सर्जित करने में किया जाता है जो की बहुत ही ज़्यदा चमकदार और uniform होती है
OLED  का  Architecture
oled architecture

OLED Architecture 



ऊपर आप OLED का architecture देख सकते है

1 ) Substrate 

substrate OLED डिस्प्ले के लिए एक base की तरह काम करता है ये बहुत ही पतले translucent glass या foil मटेरियल का बना होता है

2 ) Anode 

anode को एमिटर कहते है इसका काम होता है electrons को emit करना जब  terminals के बीच में  voltage apply किया जाता है

3 ) Organic layer  

anode के ऊपर की layer को हम organic layer कहते है ये layer conductive पॉलीमर रखती है जोकि कार्बन और हाइड्रोजन molecules से मिलके बने होती है

4 ) Conductive layer

ये layer organic plastic molecules से मिलकर बानी होती है और ये holes को anode से move करने में सहायता करती है

5 ) Emissive layer   

emissive लेयर organic मटेरियल की बानी होती है जोकि conductive लेयर के मटेरियल से अलग होता है ये electrons को cathode से transport होने में मदद करती है

6 ) Cathode 

Cathode topmost पार्ट होता है OLED displays का, ये electrons को inject करता है जब potential difference को टर्मिनल्स के across लगाया जाता है

OLED के advantages

1 ) अभी की बात करे तो ये बहुत महंगी display होती है पर हो सकता है in future ये TFT की तरह सस्ती हो जाये और हम इनका use कर सके अपने mid range devices में

2 )इनका contrast और viewing angle LCD के मुकाबले बहुत अच्छा होता है और ये अच्छा ब्लैक कलर भी produce करती है एक ब्लैक OLED डिस्प्लेये कोई भी color emit नहीं करती है जिससे OLED pixel color एक दम सही दिखाई देते है जिनसे इसका viewing angle 90 degree तक पहुच जाता है

3 ) ये plastic और organic मटेरियल से मिलके बानी होती है इसलिए ये बहुत ही ज़्यदा पतली और हल्की होती है अगर हम इनको LCD के साथ compare करे

4 ) OLED को backlight की जरूरत नहीं होती है पर LCD को backlight की जरूरत होती है इसलिए ये बहुत ही power efficient होती है

5 ) OLED का response टाइम बहुत LCD से अच्छा होता है

6 ) ये  use किये जाने पर heat को पैदा नहीं करते है और इसिलए इन्हे cold lighting source भी कहते है

OLED के disadvantages  

दुनिया में कोई भी चीज़ perfect नहीं होती है उसी तरह OLED भी perfect नहीं है पर हम कोई भी device उसकी उपयोगिता के आधार पर इस्तेमाल करते है कुछ कमियों को निगलेक्ट भी किया जा सकते है

1 ) OLED  का life time बहुत ही सिमित होता है क्यंकि ये organic materials से मिलके वाणी होती है और ये समय के साथ ख़राब होने लगते है पर इसके ऊपर अभी काम चल रहा है की कैसे इनकी life को पहले से अच्छा किया जा सके

2 ) अभी के लिए इनकी manufacturing cost कुछ ज़्यदा ही है इसलिए आपको ये displays सस्ते devices में देखने को नहीं मिलती है

3 ) पानी और  moisture के कॉन्टेक्ट में आने पर ये display बहुत ही जल्दी ख़राब हो जाते है 

OLED के Applications

OLED displays को मुख्य रूप से डिजिटल devices में use किया जाता है

for example -> mobile phones की display बनाने में ,computer monitors में ,OLED टीवी बनाने में ,

डिजिटल कैमरा बनाने में

मै आशा करता हूँ कि मैंने आपको OLED के बारे में सारी जानकरी दी है और इस जानकारी से आपको OLED क्या होती है ये clear हो गया होगा और मै आगे भी आपके लिए ऐसे ही जानकारी लाता रहूँगा 



Tuesday, February 12, 2019

Free Me Blog Kaise Banaye? ब्लॉग की पूरी जानकारी हिंदी में

Free Me Blog Kaise Banaye? ब्लॉग की पूरी जानकारी हिंदी में 

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इंटरनेट का use  तो लगभग हम सभी लोग करते है पर क्या आपको पता है हम इसकी मदद से पैसे भी कमा सकते है और वो भी अपने घर बैठे बैठे इसके लिए बहुत से तरीके है अगर आप चाहे तो इंटरनेट पर ऐसे हजारों ideas आपको मिल जायँगे की आप इंटरनेट से पैसे कैसे कामये | तो आज में आपको उन्ही तरीको में से एक तरीका जो मेरा भी पसंदीदा है उसको आपके सामने लेके हाजिर हूँ टाइटल देख के आपको इसके बारे में थोड़ा तो idea हो ही गया होगा | और आप लोगों में से कितनो ने इसके बारे में पहले भी सुना होगा पर अभी तक अपने इसको follow नहीं किया | तो हां दोस्तों आप एक ब्लॉग बना के भी इंटरनेट से पैसे कमा सकते है इसके लिए आपको ज़्यदा कुछ नहीं करना है बस आपके पास एक laptop या desktop होना चाहिए | और आपको यहाँ पर बस अपनी knowledge को दूसरे लोगों के साथ share करना है और ज़्यदा से ज़्यदा visitors को अपने ब्लॉग पर लाना है और इसके आगे की बात हम अपनी किसी दूसरी पोस्ट में करंगे क्यूंकि आज का हमरा topic दूसरा है जो इसकी सबसे पहेली कड़ी है तो में आज आपको बनाते बाला हूँ की आप Free Me Blog Kaise Banaye तो चलिए शुरू करते है देर किस बात की

तो सबसे पहले जान लेते है की blog होता क्या है और इसको बनाने के क्या फायदे है 

Blog क्या है 

अगर में आपको blog सरल भाषा में समझाऊं तो इसको आप बहुत सारे page का एक समूह मान सकते है जिसके हर page पर आपको कुछ नया पढ़ने और जानने को मिलता है ये जानकारी एक दूसरे से मिलती जुलती भी हो सकती या एक दम अलग भी हो सकती है इसको आप ऐसे समझ सकते है जैसे हम रोज़ अपनी डायरी लिखते है कि हमने आज पुरे दिन क्या क्या किया और कैसे किया हम हर रोज़ उसमे कुछ नया ही लिखते है 

technical way में कहे तो आप जब भी google या किसी भी दूसरे सर्च इंजन पर कुछ भी search करते है तो उसमे से जितने भी results आपके सामने खुल के आते है उसमे से ज़्यदातर blog ही होते है   

Blog के फायदे 

  1. इसकी मदद से आप अपने ज्ञान को दूसरों के साथ शेयर कर सकते है ब्लॉग इसके लिए एक अच्छा विकल्प है 
  2. ब्लॉग पर पोस्ट कर आप इंटरनेट पर अपनी एक अलग ही पहचान बना सकते है और आप famous हो जायँगे 
  3. ये आपको पैसे कमाने का भी मौका देता है हालांकि ये इतना आसान नहीं है पर ये सच बात है कि आप ब्लॉग बना के पैसे कमा सकते है 
  4. इंटरनेट का use सब करते है तो इसकी सहायता से आप अपने knowledge को लाखों लोगों तक पंहुचा सकते है 
  5. ये जिनको लिखना पसंद है उनके लिए बहुत ही अच्छा platform है इससे वो लोग अपनी पोस्ट को बड़े ही आराम से publish कर सकते है 
  6. ब्लॉग बनाने के लिए आपको बनाना website बनाने से बहुत ही आसान है इसके लिए आपको किसी programming का knowledge होने की कोई जरूरत नहीं है 
  7. आप अपना पोस्ट किसी भी भाषा में लिख सकते है यहाँ ऐसी कोई रोक टोक नहीं है  

Blog कैसे बनाये | 

वैसे तो ब्लॉग बनाने के लिए आपके पास बहुत सारे रास्ते है पर में उनमे से दो जो सबसे ज़्यदा popular है जिनका use बड़े बड़े professional ब्लॉगर करते है उनको बताने वाला हूँ 
  1. Blogger 
  2. WordPress 
इन दोनों की help से आप अपना ब्लॉग बना सकते है और वो भी विल्कुल मुफ्त में | ये totally आपके ऊपर है कि आप कोनसा use करना चाहते है पर अगर आप अभी न्यू है इस field में तो मै आपको blogger ही suggest करूँगा और जब आप अच्छे ब्लॉग्गिंग सिख जाते है तब आप WordPress पर move कर सकते है तो इस पोस्ट मै आपको Blogger का use करके ब्लॉग बनान सीखने वाला हूँ 

इसके लिए आपके पास एक gmail id और एक laptop या desktop जो भी आप use करना चाहे कर सकते है  

अब आप सोंच रहे होंगे की Blogger  क्या होता है तो चलिए जल्दी से इसको भी समझ लेते है

            1 ) Top 5 Search Engines जो लगातार परिणाम खोजने में हमारी मदद करते है 

            2 ) 5G Technology क्या है और ये भारत में कब आने वाली है जाने सब कुछ इसी के बारे मे

Blogger क्या है 

ब्लॉगर google के द्वारा provide की गई एक free website ही है जो सभी को अपने अपने blogs को free में publish करने देती है जिसको Pyra Labs ने बनाया था और इसको गूगल ने साल 2003 में Pyra Labsसे खरीद लिया था इसकी मदद से गूगल blogs को host करती है और आपको एक subdomain provide किया जाता है जो blogspot.com के नाम से होता है आप चाहे तो अपना खुद का एक domain खरीद के भी use कर सकते और इस नाम को अपने blog के नाम से हटा सकते है 

domain ख़रीदे के लिए आप किसी भी site का use कर सकते है google पर बहुत सारी sites है जो custom domain बेचती है पर सबसे ज़्यदा दो sites ही famous है एक तो है Godaddy और दूसरी है bigrock और मैंने भी अपना domain bigrock से ही ख़रीदा है 

Blogger पर Blog कैसे बनाये 

1 ) सबसे पहले आपको अपने लैपटॉप पर गूगल में जाके blogger सर्च कर लेना जिससे आपके सामने ब्लॉगर खुल जायेगा | या आप इस link पर भी click करके blogger.com पर पहुंच जायँगे |

2 ) यहाँ पर आपको अपनी Gmail ID से login कर लेना है  


3 ) यहाँ पर आपको display name की जगह कुछ भी जो नाम आपको पसंद हो वो आप यहाँ पर लिख सकते है और continue blogger पर आपको click कर देना है जैसे की आप नीचे देख रहे है 


4 ) अब आपको create new blog पर click करना है और इसके बाद एक और window आपके सामने खुल जाएगी | 


5 ) फिर से यहाँ पर एक नई पॉपअप विंडो खुल जाएगी जहाँ आपको कुछ चीज़ें fill करनी पड़ेंगी | 

Title -टाइटल में आपको आपके blog का नाम लिखना होगा ये आपके ऊपर है कि आप अपने blog को क्या नाम देंगे जैसे मेरे blog का नाम   Ask In Hindi  है बैसे ही आप भी कोई भी नाम रख सकते है 

Address - यहाँ पर आपको अपने ब्लॉग का address सेट करना है और blogger free है तो यहाँ पर अपने मन का address मिल पाना बहुत ही मुश्किल होता है क्यूंकि बहुत लोगों ने इस पर अपने ब्लॉग बना रखे है तो हो सकता है आपको अपने address में कुछ extra words सेलेक्ट करने पड़ जाये | 

Theme - आप कोई भी theme सेलेक्ट कर सकते है और इसके बाद आपको create blog पर click कर देना है 

6 ) आपका ब्लॉग बन के ready हो गया है अब आप यहाँ पर new post पर click कर के लिखना start कर सकते है अपनी post को लाखों लोगों तक पहुँचा सकते है पर इससे पहले आपको कुछ settings करनी होंगी 


क्यंकि अभी आपका blog देखने में अच्छा नहीं लगेगा और इसके लिए आपको इसमें एक अच्छी सी SEO friendly theme लगानी है जो light weight हो और simple हो | 

इसके लिए ज़्यदा परेशान मत हो अभी अपने अपनी यात्रा शुरू की है अभी तो आपको बहुत कुछ सीखना है तो बस यही थे blogger और उसका सारा process जो मैंने आपको समझा दिया है 


मै उम्मीद करता हूँ की आपको मेरा ये पोस्ट blogger पर free में blog कैसे बनाये अच्छा लगा होगा और अपने अपना ब्लॉग इस पर create कर लिया होगा तो तब तक के लिए नमस्कार मिलते अपनी नई पोस्ट में |  









Monday, February 11, 2019

top 5 search engines जो लगातार परिणाम खोजने में हमारी मदद करते है


Top 5 search engines जो लगातार परिणाम खोजने में हमारी मदद करते है 

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हम सभी लोग अपनी अपनी जरूरत के हिसाब से internet  पर कुछ न कुछ सर्च तो करते ही रहते है क्यूंकि internet information का एक बहुत की बड़ा source है इसपर आपको आपके किसी भी सवाल का जबाब मिल जायेगा इसके लिए बस आपको सही से सर्च करना आता हो | और इसके लिए हम सभी अपने phone या laptop में simply एक browser open कर के सबसे पहले गूगल ही टाइप करते है और अपनी query अपने हिसाब से लिख के एंटर कर देते है और ये हमे results show कर देता है पर क्या कभी अपने सोंचा है कि इसके अलावा भी बहुत सारे search engines इस दुनिया में है और इनकी help से भी आप अपने answers को पा सकते है और क्या आपको इससे पहले ये पता भी था की गूगल के अलावा भी सर्च इंजिन्स exist करते है नहीं तो आज में आपको Top 5 search engines के बारे में बताने वाला हूँ तो इसी पोस्ट पर मेरे साथ बने रहिये आपको अच्छी जानकारी मिलने वाली है सबसे पहले जानलेते है कि सर्च इंजन होता क्या है 

Search engine क्या होता है ?

search engine  इंटरनेट के माध्यम से available  software program या script है जो documents और files को keywords के लिए सर्च करता है और उस फाइल या document को आपके लिए खोज के लाता है जिसमे वो keyword होता है आज आपको internet पर बहुत सारे सर्च इंजन देखने को मिल जायंगे | जिनमे अपनी कुछ abilities and features होंगे |पहले develop किये गए सर्च engines को Archi कहा जाता था | जिनका use  FTP files को search करने के लिए किया गया था और  first text based search engine को Veronica कहा गया | आज  सबसे popular सर्च इंजन Google है। अन्य लोकप्रिय खोज इंजनों में  Bing ,Yahoo , Baidu , Ask.com शामिल हैं।


1) Google

Google की january 1996 में Larry Page और Sergey Brin द्वारा एक  research project के रूप में शुरुआत की और इस time वे दोनों लोग Stanford University in Stanford, California  के student थे। इसका मुख्य उद्देश्य  web servers के द्वारा publicly accessible documents में से text को search करना है june  2011 में Google ने Google Voice Search को introduce किया जिसकी help से आप बिना type किये सिर्फ बोल कर ही search कर पायंगे। May 2012 में Google ने अमेरिका में Knowledge Graph semantic search feature की सुविधा शुरू की। यह World Wide Web के सभी platforms पर सबसे अधिक search किया जाने वाला search engine  है, जिसमें october  2018 तक 92.74%( ये डाटा समय के साथ बदलता रहेता है ) बाजार हिस्सेदारी अपने कब्जे में कर रख्खी है| और इसके साथ साथ  Google  लगभग 85% मोबाइल traffic को भी capture करता है। इसके अलावा google के Algorithm में हाल ही में बदलाब भी किया गया है जिसका मुख्य उद्देश्य users की  needs को सीधे google पर ही पूरा करना है इसलिए उन्हें किसी link पर click करने की आवश्यकता नहीं है ये बदलाब और इसकी popularity आपके लिए अपनी website के लिए traffic capture करना कठिन बना सकती है इसके उपर प्रत्येक दिन 3.5 billions से अधिक खोज की जाती है । इसके द्वारा   लौटाए गए search results  का क्रम priority rank system पर आधारित है जिसको हम "PageRank" के नाम से जानते है | google search हमे अपने search को customize करने के लिए बहुत सारे अलग अलग option भी provide करता है 

एक web page का PageRank  कुछ factors  पर निर्भर करता है

  • The frequency and location of keywords within the Web page - यदि keyword  पेज के मुख्य भाग में केवल एक बार दिखाई देता है, तो उसे उस keyword के लिए कम score  प्राप्त होगा।
  • How long the Web page has existed- लोग हर दिन नए Web pages को create करते हैं, और सभी long time तक नहीं टिकते हैं। Google स्थापित  history  वाले pages पर अधिक ज्यदा value  रखता है।
  • The number of other Web pages that link to the page in question-  Google किसी site की  relevance का पता लगाने के लिए यह देखता है कि कितने page एक particular site से link है |

google ranks

 1 - eBizMBA Rank 
 1 - Quantcast Rank 
 1 - Alexa Rank 
 1 - SimilarWeb Rank

Pros
  1. It have large Audience and is still the top search engine.which holds well over 90% of search network market share.
  2. Ranks blogs and services.
  3. Favors fresh content over old content.
  4. Accessible on any device.
  5. Simple and easy to use.
  6. Looks good - colors, UI, etc.
  7. Fast and responsive

Cons
  1. Collects information on users as they search.
  2. Hidden content may damage ranking.
  3. Search delivers too many results to check.
  4. Limited features

2) Bing

Bing 2009 में American software company Microsoft के द्वारा launch किया गया | Microsoft का bing को लांच करने का एक ही मकसद था | कि अपने search engine से google को challenge करना पर इतनी महेनत के बाद भी वो users को अभी तक convince नहीं कर पाए है की उनका search engine google से बहेतर तरीके से result produce कर सकता है पर फिर भी इसने second position को हासिल कर लिया है  American में ३३% search इसी की help से किये जाते है और इसके search results के page लगभग google के search results से मिलते जुलते ही होते है जैसे blue links के साथ similar white background और green URL.  हालांकि बिंग additionally   "Rewards" भी  प्रदान करता है जोकि एक program ही है जो आपको search engine पर खोज या खरीदारी करने पर अंक देता है और आप इसके बाद उन rewards points को gift cards, nonprofit donations और भी बहुत सारी चीजों के लिए redeem कर सकते है पर आपको ये किसी और सर्च इंजन में देखने को नहीं मिलता है 

Bing ranks

33 - eBizMBA Rank 
43 - SimilarWeb Rank
500,000,000 - Estimated Unique Monthly Visitors 
8 - Quantcast Rank 
40 - Alexa Rank 

Pros
  1. होम पेज rank करता है, blog नहीं।
  2. hidden और non-hidden सामग्री को समान रूप से Crawl करता है।
  3. Home screen पर हर दिन एक  inspire करने वाली image होती है।
  4. यह अच्छे travel और local results सहित good add-ons के लिए जाना जाता है।
  5. अंतहीन स्क्रॉलिंग के साथ व्यापक और प्रासंगिक छवि खोज बनाता है
Cons
  1. Instant search Google की तुलना में slow है।
  2. बिंग सर्च SEO और lead generation में पिछड़ जाता है क्योंकि यह कम site visitors को आकर्षित करता है।
  3. अन्य search engines के comparison में Technical search results को अच्छे से show नहीं कर पता है
  4. बिंग मुख्य पृष्ठ से समाचार खोजता है और एक को आगे क्लिक करना होता है।
  5. Search results में forums को बहुत low rank करता है
  6. Some typical searches can be weak with less relevant results.
  7. Bing and Bing related links like Bing Blog can be sluggish leading to a poor community experience. 

3)Yahoo

Yahoo एक Internet portal  है जो topic categories के base पर एक search engine और World Wide Web sites की एक directory  को शामिल करता है।जोकि एक directory  के रूप में होते है यह नए और अनुभवी web users को सैकड़ों हजारों  Web sites और millions of Web pages प्रदान करता है। यह किसी दिए गए topic के best result पाने वाले तरीको में से एक provide करता है। चूंकि Yahoo सबसे popular Web search sites के साथ जुड़ा हुआ है, यदि जो आप search कर रहे है और वो topic आपको इसपर नहीं मिल रहा है तो ये आपको  छह या सात लोकप्रिय खोज इंजन साइटों से याहू Link  का परिणाम देगा। यह दो Stanford University graduate students, David Filo और Jerry Yang के द्वारा शुरू हुआ। अक्टूबर, 2005 तक, याहू दुनिया भर में लगभग 3.4 बिलियन पेज व्यू परोस रहा था।अक्टूबर 2011 से अक्टूबर 2015 तक,  Yahoo search विशेष रूप से बिंग द्वारा चलाई गई थी। अक्टूबर 2015 से याहू सर्च से related services प्रदान करने के लिए Google के साथ agree हुआ और तब से याहू के results Google और बिंग दोनों द्वारा चलाये जा रहे  हैं। 2014 से United States में Firefox browsers के लिए याहू default search engine है site के officials के अनुसार याहू का मतलब  "Yet Another Hierarchical Officious Oracle." है 

       2) Google Soli Project

Yahoo ranks

43 - eBizMBA Rank
8 - Quantcast Rank
490,000,000 - Estimated Unique Monthly Visitors 
67- SimilarWeb Rank
56 - Alexa Rank 
67- SimilarWeb Rank 

Pros
  1. होम स्क्रीन में news और trending topics शामिल होते हैं।
  2. वेब के बजाय vertical search के option है ।
  3. खोज, ईमेल और मौसम के लिए One-stop shop।
Cons
  1. इसमें Ads अच्छे से  labeled नहीं होती है 
  2. Search results पर आपको date नहीं देखने को मिलती है
  3. home screen पर आपको बड़े Ads देखने को मिलंगे |

4) Baidu

baidu चीन में सबसे बड़ा Chinese language search engine है जो  Robin Li ने 2000 में बनाया था |ये search opportunities के साथ साथ आपको  विभिन्न प्रकार के related search products को भी show करता है जैसे कि - image search, book ,mobile search,search, maps इसके अलावा और भी बहुत सारी चीजें ये आपको show करता है ये 2000 में जब से बना है तब से इसकी popularity चाइना में बढती ही रही है और आज ये china का सबसे popular Chinese language site है latest information के अनुसार चीन में ये सबसे लोकप्रिय खोज इंजन है जो china के 60% से भी ज्यदा search market को control करता है  Alexa ने September 2015 ये पाया की  baidu.com पर visit करने visitors global Internet users के 5.5% थे | जोकि एक बड़ा नंबर है जब हम किसी एक particular country के search engine की बात करे तो |

Baidu क्या offer करता है? 

ये mainly एक searchengine है जो Web को content के लिए scan करता है  हालांकि Baidu अपनी  MP3 search capabilities के साथ ही साथ movies और mobile search के लिए extremely popular है इसके अलावा Baidu आपको search और search-related products की एक wide range  offer करता है ये सब यहाँ list के रूप में मौजूद होते है जिसमे local search, maps, patent search, an encyclopedia,  book search, blog search etc शामिल है 

Baidu के  About page के अनुसार ये नाम एक  poem से लिया गया है जिसको आज से 800 साल पहले लिखा गया था |
  
Baidu ranks

54 - eBizMBA Rank
4 - Alexa Rank
480,000,000 - Estimated Unique Monthly Visitor
9 - SimilarWeb Rank 
150 - Quantcast Rank

Pros
  1. china के 60% से भी ज्यदा search market को control करता है
  2. BAIDU चीनी के लिए design किया गया है
  3. यह  पहेले websites को approve करता है उसके बाद ही वो इसके  platform पर show होती है 
Cons
  1. ये china के लिए बनाया गया है तो इसमें सारी चीजें उनके ही हिसाब से है 
  2. undesirable software और advertisement के लिए carte blanche देता है 
  3. आपके  browser के होम-पेज में installation-specific settings को बदलता है

5) Ask 

Ask को 1996 में Garrett Gruener और David Warthen ने Berkeley, California में बनाया था | जो एक  question answer सर्च site थी |और ये mainly  e-business पर केंद्रित है।जिसको मूल रूप से  Ask Jeeves के नाम से भी जाना जाता है इसके original software को Gary Chevsky अपने खुद के design पर implement किया था | 2000 के mid में  इसके "Jeeves" नाम को हटा के इसकी team ने अपनी खुद की algorithm अपना सारा ध्यान search engine लगा दिया था | पर 2010 तक आते आते गूगल जैसे बड़े competitor के आगे ये टिक नहीं पाए और company ने अपनी  web search technology को outsource कर दिया और बापस अपने question और answer site के business पर आ गई | Ask.com की उसके browser toolbar के लिए आलोचना को भी झेलना पड़ा | जिसमे इसके other software के साथ बंडल करने और अपने  uninstallation  difficulty के कारण इसको malware की तरह से भी treat किया गया | इसके pass केबल 0.35 की ही traffic होती है जोकि इसको बिंग और याहू की तुलना में बहुत ही मामूली विकल्प बनती है पर  Ask.com अपने question और answer format के लिए एक unique site है जबकि Ask.com के ज्यदातर search results  Google के द्वारा ही sponsor किये जाते है इसमें एक algorithm है जो अपने search topic पर ध्यान देती न की उसकी popularity कितनी है इसके अतिरिक्त Ask.com "smart answers" जैसी कुछ  unique features को प्रदान करता है, जो किसी query के answer के लिए natural language का उपयोग करते हैं।

Ask ranks

205 - eBizMBA Rank
110 - Alexa Rank 
329 - Quantcast Rank 
300,000,000 - Estimated Unique Monthly Visitors 
177 - SimilarWeb Rank

Pros
  1. ये आपके question के answer बहुत ही सटीक तरीके से करती है 
  2. इसकी technology web की difficulty पर focus करती है जबकि गूगल page को उसकी popularity के base पर rank करता है 
  3. ये smart answers जैसे unique features को provide करती है 
Cons
  1. Question और answer के लिए ही अच्छी है 
  2. इसके उपर बहुत ही कम search traffic आता है 
  3. गूगल से ही इसके ज्यदातर सर्च sponsor किये जाते है 

Conclusion

सभी search engines की अपनी अपनी कुछ खासियते है कुछ आपको आपके search results को बहेतर बनाने पर ध्यान देते है तो कुछ आपको track नहीं करते है और न जाने क्या क्या पर इस सके अलावा दुनिया में सबसे ज्यदा use किया जाने वाला सर्च इंजन गूगल ही है जिसके पास large market शेयर्स के साथ साथ लोगों का भरोसा भी है जिससे इसकी brand value भी बढ़ जाती है सबके अपने pros और cons है तो इसका मतलब ये नहीं की वो ख़राब या अच्छा है ये सब तो हमें अपने सर्च रिजल्ट्स के base पर ही decide करना होता है तो मेरे लिए तो गूगल ही सबसे बेस्ट है 


नमस्कार दोस्तों में आशा करता हूँ कि आप सब अच्छे होंगे |तो इस पोस्ट में मैंने आपको top 5 search engines के बारे में जितनी हो सकती थी उतनी जानकारी देने की एक कोशिश की है तो अगर आपको पोस्ट अच्छी लगी हो तो please comment कर के हमें जरुर बताये |





















Friday, February 8, 2019

5G technology क्या है और ये भारत में कब आने वाली है जाने सब कुछ इसी के बारे में

5G technology क्या है और ये भारत में कब आने वाली है जाने सब कुछ इसी के बारे में

हम सभी ज़्यदातर अपने फ़ोन पर ही internet को use करते है क्यंकि ये बहुत ही portable होता है और ये बहुत सारी facilities प्रोवाइड करता है इसकी help से आप internet से जुड़े सारे काम आसानी से कर पाते है और आज movies देखनी हो ,पढ़ना हो  या youtube पर videos का मज़ा लेना हो ये सब हम अपने phone से ही करना पसंद करते है पर अब ये सारी चीज़ें high quality की हो गई है तो इनका size भी ज़्यदा हो गया है अब अगर हम जो internet use कर रहे है वो उतनी fast speed न provide कर पाए तो हमे परेशानी होगी इसके लिए हमे मौजूदा technology से जोकि 4G है यहाँ G का मतलब generation से है इसकी अगली जनरेशन की जरूरत पड़ने लगी है क्यूंकि हमे slow डाटा rates के अलावा भी बहुत सारी problems face करनी पड़ रही है और इन सारी problems का solution 5G तो आइये हम इसके बारे में जान लेते है 
  

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5G technology  मोबाइल इंटरनेट connectivity  की अगली पीढ़ी है, जो पहले से कहीं अधिक तेजी से smart phones और अन्य उपकरणों पर अधिक तेज़ connection प्रदान करती  है। जिसे wireless network  की गति और responsiveness को बढ़ाने के लिए Design किया गया है। 5G में इंटरनेट को बदलने की क्षमता है और यह जैसी Self-Driving Cars, Internet of things,  Virtual Reality,अन्य तकनीकों की रीढ़ होगी। कई देश 2012 से 5G को develop करने के लिए काम कर रहे हैं और 2020 तक 5G services provide करने की योजना है। इसको millimeter waves  पर लागू किया जाएगा जो कि नेटवर्क पर  data transmit  करने के लिए 30 से 300 gigahertz के बीच की frequencies  है, इन frequencies  का उपयोग mobile devices के लिए कभी नहीं किया गया है millimeter waves का use करने से network की speed में सुधार होगा,  latency कम होगी और network की भीड़ से बचा जा सकता है लेकिन  millimeter waves के साथ चुनौती यह इमारतों को पर नहीं कर पाती है या खराब मौसम में आपको अपने phone में network न मिले पर ये बहुत छोटी problems है और इसके लिए signals को बहुत सारे small cell stations से  transmitted किया जायेगा जोकि light poles और  buildings की छत पर लगाये जायंगे |

5G मुख्य रूप से 5 technologies का उपयोग करके बनाया गया है

• Millimeter Waves -> 5G  higher frequencies  (30 से 300 GHz) का उपयोग कर रही होंगी और इन  frequencies को millimeter waves कहा जाता है

• Small Cell -> millimeter waves  की range कम होती है इसलिए हमें अधिक call antenna को street hights, building की छतो लगाने की जरूरत होती है।जिससे signal मिलने में कोई परेशानी न हो |

• Massive MIMO ->यह technology network interference  को कम करने में मदद करती है।

• Beamforming -> इसकी मदद से एक clear path को define किया जाता है कि network packets कैसे अपने source से  destination तक जायंगे।

•  Full Duplex -> एक समय में एक से अधिक लोग बात कर सकते हैं और जो send और receive किया जाता है वो different frequencies पर होता है जिससे  कोई  interference न हो।

5G को लागू करने के लिए अधिक तकनीकों को जोड़ा जा सकता है

हमे 5G network की जरूरत क्यों है 

  • 5G  Internet of things(Iot) , Self Driving Cars और  Virtual Reality जैसी कई other technologies के लिए backbone की तरह काम करेगा।
  • यह  self-driving cars की मदद कर सकता है, इन cars को जितनी जल्दी जानकारी मिलती है और उतनी ही तेजी से command response time यह हमारी सुरक्षा के लिए बेहतर होगा और 5G cars खुद को प्रशिक्षित driver से बेहतर ड्राइव कर सकेंगी । वर्तमान में 4G के साथ-साथ हमारे पास self-driving cars  हैं लेकिन अगर उनकी speed 60 किमी / घंटा से ऊपर जाती है तो कार से control बापस लेने के लिए alert करती है ।
  • 5G IoT  के साथ हमारी मदद करेगा जिससे यह ज्यदा devices को तेजी से कनेक्ट कर सकेगा ।
  • Online gaming जिनमे  तेजी से response की जरूरत होती  है उनको 5G की help से handle किया जाएगा | जो  experience को real और  exciting बना देगा।

आज के time में 4G हमारे लिए पर्याप्त नहीं रहे गया है उसके कुछ reasons है जो आप नीचे पढ़ सकते है इसलिए हमे एक fast और responsive नेटवर्क की जरूरत है 


हालांकि यह आश्चर्यजनक लग सकता है कि 5G technology develop की जा रही हैं, जबकि दुनिया के केवल 8 देशों में 80% से अधिक 4G ही use किया जा रहा है यह वास्तव में industry के छेत्र में normal बात नहीं है। क्यूंकि किसी भी चीज़ को develop करने में time लगता है और उसके लिए बड़े investment की भी जरूरत पड़ती है ।आज के time हम सभी के पास devices ज्यदा हो गए है पर 4G network की speed तो उतनी ही है इससे हम सभी को connectivity की प्रॉब्लम आने लगी है क्यूंकि 4G की bandwidth कम है

  • Low global penetration rates.
  • High costs in developing markets.
  • पर्याप्त  infrastructure और  investment की जरूरत पड़ती है 4G के deployment में |
  • Poor urban connectivity होती है और real में slow speed मिलती है 
  • 4G connections में power जरूरत ज्यदा होती है 
  • इसका latency rate ज्यदा होता है 

 5G में नया क्या है 

  • ये  प्रति सेकंड 1 Tera bit की अत्यधिक तेज speed provide करती है जबकि 4G केवल 100  Mega bit प्रति second की speed प्रदान करती है। इस speed के साथ, हर किसी को hologram tv, augmented reality और ultra large volume ट्रांसफर के साथ एक  real time experience  का अनुभव मिलता है
  • इससे आप हमेसा connected रहे पायंगे चाहे आप high speed ट्रेन या plain से  यात्रा करते हैं आप हमेशा जुड़े रहेंगे |
  • 1  millisecond की अल्ट्रा low latency जो allow करती है innovations को जैसे की  self driving cars । यह ब्रेक कमांड के साथ ट्रैफिक सुरक्षा की  guarantee देता है। 4G network में, ब्रेकिंग command एक कार को 100 km प्रति घंटे की गति से चलती है ताकि 1.4 मी के बाद पूरी तरह से उसको रोक सके। जबकि  5G के साथ, एक ही कार अपनी Ultra low latency के कारण 2.8cm के भीतर रुक जाती है।
  • 5G  में 100 billion connection प्रति किलोमीटर तक भारी संख्या में जा सकते हैं। लेकिन, 4G केवल 1000 connection ही provide करती है।
  • 4G के मुकाबले devices को कम energy की जरूरत पड़ती है 
  • पहनने योग्य उपकरणों की popularity बढ़ने के कारण, पहनने योग्य  technologies  की बढ़ती संख्या को नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। पहनने योग्य उपकरण healthcare management, improve quality of life और  work efficiency प्रदान करेंगे।for example ultra-light, low energy-consumption और waterproof sensors को implement किया जा सकता है।
इनको भी पढ़े

Google Soli Project

5G काम कैसे करती है 

Wireless network cell sites से मिलकर बना होता है जो sectors में बटे होते है जो data को radio waves की मदद से send करते है fourth generation जिसको हम 4G के नाम से जानते है उसकी  Long-Term Evolution (LTE) wireless technology ने ही 5G का foundation तैयार किया है जहाँ 4G में बड़े और high power cell towers की जरूरत होती है signals को लम्बी दुरी तक radiate (विकीर्ण) करने के लिए वहीं 5G में wireless signals बहुत सारे छोटे cell stations के द्वारा transmit होते है जोकि light poles और building roofs पर लगाये जाते है  multiple small cells का use जरुरी होता है क्यंकि millimeter wave spectrum में - band of spectrum 30 GHz और 300 GHz के बीच में होता है जो  5G उच्च गति उत्पन्न करने के लिए निर्भर करता है केवल कम दूरी पर यात्रा कर सकता है और इन signals पर weather और किसी भी physical obstacle से हस्तक्षेप हो सकता है जैसे की buildings

अगर हम देखे की पहले की wireless technology किस spectrum frequency को use तो उनमे spectrum के lower-frequency bands का use किया जाता था | millimeter wave challenges जिससे की distance और interference ज्यदा होती है उससे निपटने के लिए wireless industry ने 5G network के लिए भी lower-frequency spectrum उपयोग पर विचार किया ताकि network operator उन spectrums का use कर सके जो उनके पास पहेले से ही मोजूद है lower-frequency spectrum ज्यदा distance तक पहुँच सकता है लेकिन millimeter wave के compare में कम capacity और speed होती है 

5G का deployment status क्या है 


5G को मुख्य रूप से 4 बड़े देश ही develop करने में लगे हुए है जोकि United States, Japan, South Korea और  China है Technology Business Research Inc के अनुसार Network operators  2030 तक लगभग करोड़ों dollars 5G के लिए खर्च करने बाले है जिससे इसको बड़े पैमाने पर use किया जा पायेगा | हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि 5G सेवाएं उस investment का return investors को कैसे करेंगी अनुमान ये है कि new startups और  business models जो 5G का लाभ लेंगे वहीं investors के revenu का source होंगे | 

इसके साथ ही, मानक निकाय universal 5G equipment standards पर काम कर रही हैं। 3rd  Generation Partnership Project  (3GPP) ने december 2017 में 5G के New Radio (NR) standards को मंजूरी दे दी और 2018 के last में 5G  cellular services के लिए required 5G mobile core standard को पूरा करने की उम्मीद है। 5G radio system 4G radio system के साथ compatible नहीं है। लेकिन नेटवर्क ऑपरेटरों ने हाल ही में wireless radios  खरीदा है जो मोजुदा equipment को ही software की सहायता से  new 5G system में upgrade करने में सक्षम हो सकता है जोकि  5G wireless equipment standards के साथ almost पूरा हो चूका है और आपको पहेले 5G enable smartphones और  wireless devices आपके लिए commercially 2019 में available हो जायंगे और  5G use  2020 तक होने की उम्मीद है Technology Business Research projections के अनुसार 2030 तक 5G services  mainstream  बन जायंगी | 

5G के challenges

किसी भी उभरती हुई technology के साथ कुछ न कुछ challenges जरुर होते है जो इसके साथ भी है जिनके साथ deal करके ही इसको develop किया जा सकेगा |अगर हम पहेले के time पर एक नज़र डाले तो radio technology के आने के बाद technology के छेत्र में बहुत ही progress देखने को मिली और 1G की शुरुआत से 5G तक के सफ़र में लगभग 40 साल लग गए इस सब के बाब्जूद हमे जो common challenges देखने को मिले है वो है lack of infrastructure, research methodology, और  cost
चलिए हम इनको कुछ points की helps से समझ लेते है

Inter-cell Interference

ये एक बहुत ही बड़ा technological मुद्दा है जिसको solve करने की जरूरत है क्यूंकि traditional macro cells और concurrent small cells  की size में variation है जो interference का कारण बनेगी |


Efficient Medium Access Control

जहाँ access points के dense deployment और user terminals की जरूरत है उस situation में user throughput कम होगा ,latency ज्यदा होगी और  high throughput provide करने के लिए hotspots cellular technology के लिए सक्षम नहीं होंगे | technology को optimize करने के लिए research करने की आवश्यकता है।

Traffic Management 

अगर हम पारंपरिक human to human traffic का cellular networks में तुलना करे तो एक ही cell में Machine to Machine (M2M) devices की एक बड़ी  संख्या serious challenges का कारण बन सकती है for exaple-radio access network (RAN) challenges जोकि overload और congestion का कारण बनेगी |

Infrastructure 

शोधकर्ताओं को  5G services के  standardization और application की तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

Communication, Navigation, & Sensing

ये सारी services काफी हद तक radio spectrum की availability पर निर्भर करती हैं, जिसके द्वारा signals transmit होते हैं। हालांकि 5G technology  में विभिन्न और अलग-अलग sources से आने वाले data की भारी मात्रा को process करने की power है, लेकिन इसके लिए बड़े infrastructure support की आवश्यकता है।  

india में कब तक आयेगी 


हमारे यहाँ और देशों के मुकाबले 2G, 3G और 4G काफी देर से आया पर इस बार indian government उस गलती को repeat नहीं करना चाहती है और इसीलिए हमारी government कोशिश भी कर रही है पर इसके लिए  telecom sector को भरी investment करने की जरूरत है और हमारे airtel , jio लगातार इसी ओर कोशिश में है कि कैसे जल्दी से जल्दी india में 5G लेके आयें पर हमारे यहाँ का  spectrum भी महँगा है जो थोड़ी सी परेशानी का कारण बन सकता है  Indian telecom regulator ने  5G सेवाओं के लिए 3,300-3,600 मेगाहर्ट्ज बैंड में 20MHz ब्लॉकों की नीलामी की सिफारिश की है जिसकी कीमत 492 करोड़ प्रति मेगाहर्ट्ज राखी गई है जबकि दक्षिण कोरिया में,june में आयोजित नीलामी में एक ही बैंड की कीमत लगभग same 131 करोड़ प्रति मेगाहर्ट्ज थी। बहुत कम संभावना है कि 5G को 2020 तक भारत में लॉन्च किया जाएगा। चीन, अमेरिका और दक्षिण कोरिया 5 जी के साथ commercial तोर पर आने वाले पहले हो सकते हैं।इसके अलावा भारत आंतरिकत public use के लिए सस्ते 5G devices के विकास के लिए चीनी निर्माताओं पर निर्भर करेगा।

Advantages


  • 5G के साथ 10 Gbps  या उससे अधिक Data rates को  प्राप्त किया जा सकता हैं। यह बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव प्रदान करता है क्योंकि download और upload speeds अधिक है।
  • इसमें Latency को 1 एमएस से कम की क्षमता प्राप्त की जा सकती है। यह 5 जी नेटवर्क द्वारा 5 जी नेटवर्क के साथ तत्काल कनेक्शन स्थापना और रिलीज की ओर जाता है। इसलिए 5G बेस स्टेशनों पर ट्रैफिक लोड कम हो जाता है।Higher bandwidth का उपयोग carrier aggregation feature की सहायता से किया जा सकता है।
  • Antenna का आकार higher frequecies पर छोटा होता है। इससे high data rates को प्राप्त करने के लिए बड़े पैमाने पर MIMO concept  का उपयोग होता है।
  • Pathloss को higher frequencies पर कम करने के लिए Dynamic beamforming का use किया जाता है।
  • 5G network architecture में सुधार के लिए networkdue सुचारू है और इसलिए जब mobile user cell को बदलता है तो  data transfer पर इसका कोई effect नहीं पड़ता है।
  • Typically 5G 10x  throughput,  latency में 10x की कमी, , 3x  spectrum efficiency, 100x traffic capacity और 100x network efficiency प्रदान करता है।


Disadvantages

  • इसे 5G network स्थापित करने और बनाए रखने के लिए skilled engineers की जरूरत होती है। इसके अलावा 5G devices भी  महंगे हैं। इससे 5G deployment और maintenance चरणों की लागत बढ़ जाती है।
  • 5G  smartphones  महंगे होते हैं। इसलिए आम आदमी को 5G technology का use करने में थोडा ओर समय लगेगा। जब ये तक ये पूरी तरह से नहीं आ जाती है |
  • यह 5G network में security और privacy के मुद्दों को पूरी तरह से solve  करने में समय लेगा।
  • पुराने devices में से कई 5G के लिए  competent नहीं होंगे, इसलिए उन सभी को replaced करना होगा वो एक expensive deal होगी ।
  • बुनियादी ढांचे के high investment  की जरूरत है।



मै आशा करता हूँ कि मैंने अपनी इस post में अपने सभी readers को इस 5G technology से जुडी सारी जानकारी provide की है और आपको ये जानकारी पसंद भी  आई होगी | मैंने अपनी ओर से इस के बारे में जो भी आपको पता होना चाहिए वो सब बताने का प्रयास किया है पर फिर भी कुछ रहे गया हो या कोई गलती हो गई हो तो में तहे दिल से अपने रीडर्स से छमा चाहता हूँ और मै चाहूंगा की आप अपना सुझाब comment box में जरूर लिखे |